बातम्या

झारखंड में मिला दसवीं सदी का बुद्ध विहार

झारखंड की राजधानी रांची के नज़दीक हज़ारीबाग ज़िले में जुलजुल पहाड़ी के नीचे की तरफ, पाल राजवंश के समय का एक बुद्ध विहार पुरातात्त्विक उत्खनन में प्राप्त हुआ है। समय दसवीं सदी आंका गया है। जुलजुल पहाड़ी के निचले हिस्से में कुछ छोटी टेकड़ियाँ थीं। पिछले बरस वहाँ खुदाई करते समय बौद्ध संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए थे लेकिन कोविड लाॅकडाउन के चलते ये खुदाई का काम बंद कर दिया गया था।

इससे पहले उत्खनन की पहली फेरी में जनवरी मास में बौद्ध विहार के अवशेष दिखाई पड़े थे। यहाँ तीन कक्ष मिले हैं जिनमें एक तरफ ध्यानस्थ मुद्रा में बुद्ध मूर्ति के चार शिल्प तथा भूमि स्पर्श मुद्रा का एक शिल्प प्राप्त हुआ है। डाॅ नीरज मिश्रा, सहायक पुरातत्ववेता ने बताया कि ये वज्रयान पंथ का बुद्ध विहार था। जो 2500 वर्गफीट में स्थापित किया गया था। यहाँ तारा की मूर्ति प्राप्त हुई है। जो महायानी पंथ में स्त्री बोधिसत्व का एक रूपक है।

वज्रयान पंथ में उन्हें अनेक रूपों में शिल्पित किया गया है। पूर्व में ये स्थान बहुत बड़ा धार्मिक स्थल रहा होगा क्योंकि सारनाथ और बुद्धगया जाने के लिए यहीं से प्राचीन मार्ग निकलता है। प्रवेश द्वार के अलावा सीढ़ियां भी यहाँ उत्खनन में पायी गयी है। सीतागढ़ ज़िले में बोरहानपुर में भी बुद्ध शिल्प प्राप्त हुए हैं। झारखंड में नये बौद्ध स्थल प्राप्त होने से ये प्रमाणित होता है कि संपूर्ण भारत वर्ष में बौद्ध संस्कृति एक समय फलती फूलती रही थी।

लेखक -संजय सावंत
प्रस्तुति : राजेंद्र गायकवाड़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *