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क्यों बारूदों का ढेर बना बुद्धमय बामियान?

आतंकवादी संगठन तालिबान ने आज काबुल सहित लगभग अफगानिस्तान के सभी हिस्सों में कब्जा कर लिया है। बंदूक की नोक पर सरेआम महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। विरोधियों का चुन चुनकर नरसंहार किया जा रहा है। यहां तक कि विदेशी महिला पत्रकारों को बुर्का पहनकर पत्रकारिता करनी पड़ रही है। तमाम राजदूत भी डरे हुए हैं। यह पहली दफा हुआ है जब तालिबान ने बगैर बंदूक चलाए काबुल पर कब्जा किया है। इससे पूर्व 1996 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तब बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी लेकिन इस बार तालिबान के डर से खुद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति देश छोड़कर भाग गए, सेना बिना लड़े सरेंडर हो गई और जनता में भी विरोध प्रदर्शन नहीं दिखा।

हालांकि अब जनता में आंदोलन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पंजशीर से अहमद शाह मसूद और तालिबान के प्रथम उपराष्ट्रपति अमृल्ला सालेह तालिबानी विरोधी Northern Alliance 2.0 का आह्वान कर दिया हैं। उन्हें दुनिया से मदद की जरूरत है। दुनिया को आगे आकर तालिबान विरोधी गुट की मदद करनी चाहिए। जनता तालिबान को सिरे से नकार रही है। तालिबान के लोग बहुत अच्छे होते हैं। भारत के तमाम यूनिवर्सिटी में यहां छात्र पढ़ने आते हैं। कभी कोई रार नहीं। आइए बामियान की महान संस्कृति और तालिबान की बर्बर कुकृति पर एक नजर डालते हैं।

अफगानिस्तान से 150 किलोमीटर दूर बामियान वह ऐतिहासिक क्षेत्र है जो पूरी दुनिया में तथागत बुद्ध की मूर्तियों के लिए जाना जाता है यहां बुध की दो मूर्तियां थी बड़ी मूर्ति वेरी की मुद्रा में और छोटी मूर्ति शार्क की मुद्रा में। ईसा पूर्व से लेकर सातवीं आठवीं शताब्दी तक अफगानिस्तान बुद्धमयी था। 165/155-130 ईसा पूर्व के दौरान, यहां के राजा मिनांडर एक बुद्धिस्ट थे। उन्होंने अपने शासन के दौरान धम्म का संरक्षण किया। आमजन में खुशहाली थी। राजा मिनांडर और भिक्षु नागसेन के साथ उनकी प्रसिद्ध बातचीत ‘मिलिंडपंहो’ में दर्ज हैं। चारो ओर संपन्नता थी। महिलाएं आज़ाद थीं।

भारत, चीन, जापान, वियतनाम सहित दुनिया के तमाम विश्वविद्यालयों में ‘मिलिंडपंहो’ को पढ़ाया जाता है। सम्राट कनिष्क ने बामियान में अनेक बौद्ध स्तूप बनवाए थे जहां लोगों को बुद्ध धम्म की शिक्षा दी जाती थी। देश दुनिया से लोग धम्म को पढ़ने यहां आते थे। 400-632 ईसा पूर्व में प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान एवं व्हेनसांग बामियान में यात्रा करने आए थे। कोरियाई बौद्ध भिक्षु हुई चाओ ने भी 727 ईसा पूर्व में यहां यात्रा करने आए थे। कम शब्दों में कहें तो बामियान पूरी दुनिया में अपनी कला, तत्वज्ञान, वैज्ञानिक सोच एवं धम्म शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था। चीनी, कोरियाई, फ्रेंच, ब्रिटिश खोजकर्ताओं, यात्रियों एवं इतिहासकारों ने अपने लेखों में बामियान की बुद्ध संस्कृति का वर्णन किया हैं।

बामियान की गंधार संस्कृति की प्रसिद्धि करीब 8वीं शताब्दी तक पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थी। गंधार संस्कृति के प्रमुख केंद्र जलालाबाद, हड्डा, बामियान, स्वात घाटी और पेशावर थे। ज्ञात हो कि गंधार शैली बुद्ध की पहली बार सुंदर एवं भव्य प्रतिमाएं बनाने के लिए जानी जाती थी। हजारों आक्रमण के बावजूद मुगल शासन के दौरान तक गंधार शैली जीवित थी।

तालिबान बिल्कुल भी नहीं बदला है। काबुल पर कब्जा करने के दो दिन बाद ही तालिबानियों ने बामियान में हजारा नेता अब्दुल अली मजारी की मूर्ति को उड़ा दिया है। यह घटना 2001 के आतंक की याद दिला रही है। 02 मार्च 2001 को तालिबानी धार्मिक कट्टरपंथियों ने बंदूकों और बमों से बामियान की मूर्तियों पर रॉकेट लांचर से हमला किया। मूर्तियों की बनावट इतनी मजबूत थी कि मूर्तियों को कुछ नहीं हुआ। बर्बर तालिबानियों के मन में प्रतिमा को तोड़ने की जिद थी। उन्होंने मूर्तियों का खनन करके यानी सुरंग बनाकर उसमें विस्फोट कर दिया। इस विस्फोट से शाक्यमुनि मुद्रा में छोटी प्रतिमा पूरी तरह से नष्ट हो गई लेकिन वैरेकन मुद्रा में खड़ी बड़ी मूर्ति के केवल पैर ही टूटे। पूरी मूर्तियों को नष्ट करने में तालिबानियों को 25 दिन लग गए। और इस इस तरह अपनी जहिलपन का परिचय देकर तालिबानियों ने जश्न मनाया।

भारत ने इस घटना का कड़ा प्रतिकार किया और इन मूर्तियों को अपने खर्चे पर भारत लाना चाहा लेकिन तालिबानियों ने इस प्रस्ताव को नकार दिया। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, चीन, जापान, वियतनाम, म्यामार सहित दुनिया के सभी देशों ने इसकी कड़ी भर्त्सना की। धार्मिक कट्टरता ने बुद्धमय बामियान को बारूदों का ढेर बना दिया है। यूनेस्को के साथ मिलकर जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन सभी देश बुद्ध की प्रतिमा के पुनर्निर्माण का प्रयत्न कर रहे हैं। मगर अफसोस अफगानिस्तान पर फिर से उन्ही तालिबानियों का कब्जा हो गया है। मूर्ति के पुनर्निर्माण की अपेक्षा वहां की महिलाओं, बच्चियों की सुरक्षा जरूरी है। पूरी दुनिया को मिलकर तालिबान का खात्मा करना होगा। आतंकवाद किसी एक देश के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया एवं मानवता के लिए खतरा हैं। बंदूक, बम और बारूदों के दम पर सत्ता हथियाने से उन्हें एक देश नहीं माना जा सकता है। Taliban is not a Nation, Taliban is a Terror Notion.

– सूरज कुमार बौद्ध

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