इतिहास

‘वीर शिवाजी के बालक हम’ १९५३ साली महार रेजिमेंटचे हिंदी संचलनगीत…

ले.कर्नल घाशीराम यांनी सागर येथे ३० नोव्हेंबर १९५३ ला महार रेजिमेंटल सेंटरचे नेतृत्व स्वीकारले. त्यांनी सेंटरमध्ये उपयुक्त योजना सुरू केल्या. त्यांनी हिंदी महार सैनिक संचलनगीत ‘महार सैनिक’ हे स्वत:रचले व ‘ A Marching Song of Mahar Sainik म्हणून प्रचारात आणले. ते गीत असे…

वीर शिवाजी के बालक हम,
हैं महार सैनिक हम, हम, हम।
ना मशीनगन में ही कौशल,
निपुण सभी शस्त्रो में हम, हम।
वीर शिवाजी के बालक हुम॥

जन-सेवक हैं, सैनिक-वर हैं,
दृढ़ता शील दया के घर हैं।
मातृ-भूमि-सेवा-हित करते,
हम हरदम कर श्रम, श्रम, श्रम।
वीर शिवाजी के बालक हम॥

चाहे पड़ रही धूप कड़ी हो,
वर्षा की लग रही झड़ी हो।
आँधी या तूफान उठा हो,
चमक पड़े बिजली चम, चम, चम्।
वीर शिवाजी के बालक हम॥

तो भी कार्य न छोड़ें हम,
धर्म से मुंह न मोड़े हम।
कठिनाई से कभी न डरते,
आगे बते कदम-कदम।
वीर शिवाजी के बालक हम॥

हर नारी माँ-बहिन हमारी,
उनकी रक्षा के प्रणधारी।
तजे कुसंगति; संगति प्यारी,
घर सहन शक्ति हम, हम, हम।
वीर शिवाजी के बालक हम॥

फैशन त्याग सादगी लावें,
व्यसनको हम दूर भगावें।
सैनिक ‘रमतेराम’ जतावें,
हदि लै मानवता हम, हम, हम।
वीर शिवाजी के बालक हम॥

विद्या धारण ध्येय हमारा,
जन-सेवा संकल्प हमारा।
ब्रह्मचर्य में नित रत रहकर,
रहें सत्य पर दृढ़ हम, हम, हम।
वीर शिवाजी के बालक हम॥

महार सैनिक को अति प्यारा,
मरून रंगका ध्वज यह न्यारा।
सैनिक-शक्ति प्रबलता द्योतक,
झंडा उँचा रहे हमारा
वीर शिवाजी के बालक हम॥

जन-सेवक हैं सैनिक-वर हैं,
दृढ़ता शल दया के घर हैं।
मातृ-भूमि-सेवा-हित करते,
हम हरदम कर श्रम, श्रम, श्रम,
वीर शिवाजी के बालक हम॥

संदर्भ : डॉ.भीमराव रामजी आंबेडकर, खंड ८, चांगदेव भवानराव खैरमोडे,
(पेज क्रमांक ३१०)